Thursday, September 10, 2020

कॉलेज का पहला दिन

कॉलेज का पहला दिन


"कुछ लोग नमक की तरह होते हैं जो पानी में झट से घुल जाते हैं। पर….मैं शक्कर की तरह हूँ मुझे थोडा टाईम लगता हैं।” सच कहूँ तो अपने इसी व्यक्तित्व के कारण मुझे हमेशा से नई जगह और नए लोगो के बीच जल्द तालमेल बिठा पाने में काफी मशक्क़त करनी पड़ती हैं। 

एक कॉलेज किसी भी छात्र के जीवन में एक नई शुरुआत होता है। स्कूल के बहुत अनुशसित जीवन के बाद ही कॉलेज देखने का नसीब होता है। यह हमे स्वतंत्रता के साथ नई जिम्मेदारी का भी एहसास करवाता है। कॉलेज आने के कुछ दिनों बाद से ही हमें इस बात का एहसास होता है कि वाकई अब हम बड़े हो गए हैं और अपनी मनमानी कर सकते हैं। हम खुद को स्वतंत्र पंछी कि तरह महसूस करने लगते हैं।

हमारा जीवन हमेशा आगे बढ़ते जाता है और हमारे साथ कई सुनहरी यादें जुड़ती चली जाती हैं। कुछ घटनायें बस यादों के झरोखे में ही सँजोये रह जाते हैं। और कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिन्हे अकेले में भी याद कर कर के लोटपोट होते रहते हैं। 

कॉलेज का पहला दिन ही मेरे जीवन में अलग तरह की आनंद और उम्मीदें ले कर आईं थी। मेरे लिए वह एक अविस्मरणीय दिन था। उस घटना ने मेरी जिंदगी बना दी और मुझे एक सच्चे जीवन साथी कि तलाश पूरी की। प्यार एक गहरा और खुशनुमा एहसास है। जब किसी से प्यार होने लगता है तो रिश्ते की शुरआत में हम अक्सर सिर्फ सकारात्मक चीज़ें ही देखते हैं, और सातवें आसमान में महसूस करते हैं। 

बात आठ साल पहले की है जब मैं एक साल की कड़ी मेहनत और काउंसिलिंग के तमाम rounds की भाग-दौड़ के बाद आखिरकार मेरी मेहनत रंग लाई और मुझे देहरादून के शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग  में दाखिला मिला। मैं तो खुश था ही लेकिन मेरा परिवार मुझसे कहीं ज्यादा खुश थे। उनके खुशी का कारण यह था कि हमलोग देहरादून ही रहते थे और वह कॉलेज भी देहरादून में ही था।

कॉलेज के पहले दिन मुझे मेरे पापा खुद ही कॉलेज तक छोडने आए थे। उन्हें विदा कर पहली बार यह अहसास हो रहा था कि अब मैं उनके सुरक्षा कवच से बाहर इस दुनिया में कदम रख चुका हूं और यहां से आगे की राह खुद ही तय करनी है। कॉलेज का पहला दिन था, मैं बहुत उत्सुक था, लेकिन सच पूछे तो मन में एक डर था, कहीं रैगिंग हो गई तो। सहमे हुए कदमों के साथ मैंने कॉलेज कैम्पस में एंटर किया। मैं कुछ कदम चली ही थी कि सामने से लड़के और लड़कियों का एक ग्रुप आता दिखा।

मैने झट से रास्ता बदल लिया और तेजी से दूसरी तरफ भाग खड़ा हुआ। कुछ दिनों तक मेरी इसी तरह आँखमिचोली चलती रही लेकिन मेरी यह चालाकी भी ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाई, आखिर वो seniors जो थे। मैने देखा कि एक दिन वो seniors सामने से आ रहे थे फिर मैं जैसे ही पलटकर दूसरे रास्ते कि तरफ जाने को हुआ तो देखा कि उस रास्ते से उन्हीं seniors का एक दल उस रास्ते से मेरी तरफ आ रहा था।

तभी मैने देखा कि कुछ seniors कुछ new students की रैगिंग कर रहे थे। तभी मेरी नजर उन्हीं students के बिच एक बेहद खूबसूरत लड़की पारुल भार्गव पर पड़ी जो बेहद ही खूबसूरत थी। मैने उसकी bold नेचर कि वजह से ही उसे पहले दिन उसका नाम जान लिया था। दरअसल कॉलेज के पहले दिन ही फ्रन्ट सीट पर बैठने के लिए मुझसे भीड़ गई थी। वैसे भी वह कॉलेज की सबसे आकर्षक लड़की, जो भी देखे बस नजर हटाये बिना देखते रहता था।

सभी नये students उन seniors के आगे सर झूकाये खड़े थे। उतने मे ही सिनीयर का ग्रुप लिडर जो रैगिंग करवा रहा था।

मेरे पास आज बचाव के सारे रास्ते बंद थे इसलिए मैंने मन में सोचा,

“बेटा तैयार हो जाओ आज तो तुम्हारी रैगिंग पक्की है। अब कॉलेज आए हो तो यह इन सब से गुजरना ही होगा एक ना एक दिन। तो बाबू अब वो वक़्त आ गया है।"

मेरे मन में रैगिंग का डर इतना गहरा था कि मेरे कदम अपने आप वहीं रुक गए। लेकिन सीनियर्स का वह ग्रुप मेरी ओर बढ़ा चला आ रहा था। मैं अगला कदम भरने की हिम्मत ही जुटा रहा था कि वे सब मेरे सामने आ कर खड़े हो गए।

उनमे से एक बोला, “बच्चे बहुत बच लिए चल आजा! आजा आज मजे चखाता हूँ तुमको!”

यह कहते हुए वो मुझे उन seniors के पास ले गया जहां पारुल भार्गव पहले से मौजूद थी। उनमें से एक ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा,

“न्यू एडमिशन?”

मैंने बिना कुछ कहे बस हां में सिर हिला दिया। मेरा डर मेरे चेहरे पर साफ दिख रहा था, माथे से पसीना फिसल कर गाल तक आ चुका था। मैंने पसीना पोछने के लिए हाथ उठाया कि इतने में दूसरा सवाल आया,

“कौन सी स्ट्रीम?”

मैंने फिर सहमी हुई आवाज में जवाब दिया, “मकैनिकल इंजीनियरिंग!”

मैं बचपन से ही पढ़ाई में तेज था और स्कूल में हमेशा क्लास में फर्स्ट आने के अलावा मॉनिटर भी रह चुका था। लेकिन यहां इन सीनियर्स की टोली के सामने मेरी सिट्टी पिट्टी गुम थी।

 
मेरे मन में तरह तरह के सवाल उठ रहे थे, “अब क्या होगा, क्या ये लोग मुझे गाना गाने को कहेंगे, या फिर मुझे किसी टीचर को तंग करने का टास्क दिया जाएगा, कहीं ये लोग मेरे साथ कोई बदतमीजी तो नहीं करेगें। 



मैं ये सब सोच ही रहा था कि सीनियर्स की टोली में से एक senior ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। मैं और डर गया। इसके बाद जो होने वाला था, यकीनन वह मेरी सोच से परे था। तभी एक सीनियर ने मेरे तरफ देखते हुए कहा, “क्या नाम है तेरा?”

मैं डरते हुए बोला, “ज... जी मेरा नाम सानिध्य बड़थ्वाल है और मैं यहीं देहरादून का ही रहने वाला हूँ।”

“चुप एक दम चुप! तुझे हमने पूछा क्या कि तू किस जगह से है? तुझसे जितना पूछा जाए बदले में जवाब उतना ही मिलना चाहिए।”

उसकी इस धमकी से मैं कांप गया। मुझसे आज तक इस तरह से किसी ने बात नहीं कि थी। उसने यह बात चीखकर कही थी इस वजह से मुझे बड़ा अजीब लगा था। यहाँ इतने सारे students थे सभी ने अपनी नजरे झुकाई हुई थी जैसे वो सभी कोई बड़े गुनहगार हों। तभी अगली आवाज आई,

“तू वहीं है ना जो हमे देख के रोज अपने रास्ते बदल लेता था?”

मैं बोला, “Sorry sir, but I will never repeat it again.”

मेरा जवाब सुनते ही इस बार वह और बौखला गया और बोला, “वाह English क्या बात है? हमारे सामने अंग्रेजी झाड़ेगा। यह बात अच्छे से अपने भेजे में घुसा ले कि तुझे हमेशा हिन्दी में ही जवाब देना है वो भाई तब जब हम seniors जवाब देने को कहें।”

मैने इस बार कुछ नहीं कहा। उस senior वहीं पास में एक गुलाब का फूल तोड़ा और मेरे मेरे हाथ में देते हुए बोला,

“उस लड़की को देख रहे हो ना? जाओ उस लड़की को प्रपोज करो और हाँ एक बात का ध्यान रखना इस गुलाब को तुम्हें उसी को देना है और खाली हाथ ही वापिस आना है।”

मैने अपनी नजर घुमा के देखा तो उसने पारुल कि तरफ इशारा करते हुए कहा था। यह तो वही लड़की थी जिसेके साथ कॉलेज के पहले दिन झड़प हो गई थी। मैने अपने सिर पर हाथ मारा और अपनी किस्मत ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दिया। मैं धीमे कदमों से उसकी तरफ बढ़ा और उसके सामने जा कर खड़ा हो गया और उसकी तरफ वह लाल गुलाब का फूल बढ़ाते हुए बोला,

“तेरी खुशबू को ज़रा महसूस करूँगा; 
तेरी बात को मैं ज़रा गौर से सुनुँगा; 
ले कर मेरा यह गुलाब अगर तू मेरी हसरत को पूरा करे; 
तो देखना आज से ही मैं ज़िन्दगी भर तेरी पूजा करूँगा।
I love You Parul, Please accept it.”

मेरा इतना कहना था कि तभी पारुल ने उस गुलाब के फूल को अपने हाथों में पकड़ा और खींच के मेरे मुंह पर फेंक दिया। मुझे उसकी यह हरकत देखकर बहुत बुरा लगा। मैं वैसे भी किसी लड़कियों में समय बर्बाद करने कि जगह अपना समय किताबों में देना बेहतर समझता था। वो अपने आप को किसी महारानी जैसी समझने लगी थी लेकिन वह यह भूल गई थी कि यह महज एक रैगिंग का हिस्सा था जिसे मुझे किसी तरह से पूरा करना था।

वो तो ऐसे react कर रही थी जैसे मैने सच में उसे प्रपोज कर दिया हो। अब बात प्रतिस्ठा पर आ गई थी। उस दिन तो लड़की होने कि वजह से मैने अपनी seat उसे दे दी थी लेकिन आज अच्छा खासा मौका मिला था उस दिन का हिसाब बराबर करने का। इसलिए मैने एक आखिरी शायरी कही,

“अजब सी बेकरारी है; दिन भी भारी था, रात भी भारी है;
 अगर मेरा दिल तोड़ना है तो शौंक से तोड़िए; 
 लेकिन यह गुलाब का फूल ना हमारी है ना तुम्हारी है।”

यह कहते हुए मैने उसके बालों में वह गुलाब का फूल घूंसा दिया। मेरी इस हरकत से वह आग बबूला हो गई और उसने घुमाकर थप्पड़ मार दिया।

“चटाकssss”

इस आवाज से वहाँ का वातावरण गूंज उठा। वो तो सही हुआ कि मैं ऐन वक़्त पर नीचे झुक गया था और वह चांटा सीधे उस senior के गाल पर लग गया था। सभी ठहाके लगा कर हँस रहे थे और मैं भी उन सभी कि हंसी में साथ दे रहा था। उस senior के अलावा बाकी senior भी हँस रहे थे। वह गुस्से में वहाँ से चला गया और हम सभी भी अपनी class के लिए आगे बढ़ चले थे।

यह पहला मौका था जब मैने अपनी छाप उस college में छोड़ी थी। उस दिन के बाद मेरी और रूल में अच्छी दोस्ती हो गई। लेकिन आज भी उस घटना को 8 साल से अधिक का समय हो गया है लेकिन आज भी उस घटना के बारे जिक्र करता हूँ तो दोनों ही फूले नहीं समाते। 

सच यह मेरे जीवन की सबसे अनमोल घटना थी जिसकी वजह से मैं और पारुल करीब आए थे। आज हम दोनों पति पत्नी हैं और वह हमारे 2 साल के बेटे चिंटू के साथ बहुत खुश है। प्यार का असली मतलब ही जुड़ाव होता है की आप सामने वाले से एक अलग तरह से जुड़ गए हो जहाँ से आपको कोई भी अलग न कर पाए| आज चिन्टू हम दोनों की प्यार की निशानी था। लेकिन आज भी जब मैं पारुल को अपने सामने देखता हूँ तो लगता है यह पल यहीं ठहर जाए और उसे अपने सामने बैठाकर उस घटना का जिक्र करूँ जब उसके चांटे से खुद को बड़ी चालाकी से बचाया था। 


"समाप्त"

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